Justice ⚖ for girls

रेप जैसी दुर्घटना पर लिखना हो रहा मुश्किल है, खुद मैं भी एक औरत हूँ, इस दर्द को सहना मुश्किल है, अन्धेरे की बात नहीं, अब दिन में निकलना मुश्किल है, पढ़ लिख कर अब करें भी क्या ? जब घर से निकलना मुश्किल है, अब नारी के हक की लड़ाई क्या? स्वाभिमान बचाना मुश्किलContinue reading “Justice ⚖ for girls”

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